लखनऊ में टोल घोटाले का बड़ा खुलासा, 900 ट्रकों के नंबर फर्जी
राजधानी लखनऊ में टोल प्लाजा से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि महज एक महीने के भीतर करीब 1600 ओवरलोड ट्रक टोल प्लाजा से गुजरे, जिनमें से लगभग 900 ट्रकों के नंबर पूरी तरह फर्जी पाए गए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन संदिग्ध वाहनों का न तो कोई चेसिस रिकॉर्ड मौजूद है और न ही परिवहन विभाग के पोर्टल पर उनका कोई डेटा दर्ज है। इससे साफ होता है कि ये ट्रक आधिकारिक रिकॉर्ड में कहीं मौजूद ही नहीं थे, बावजूद इसके ये खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे थे।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल में टोल प्लाजा के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। आरोप है कि टोलकर्मी खुद ही मनमाने वाहन नंबर दर्ज कर रसीद जारी कर रहे थे, जिससे ओवरलोडिंग और अवैध खनन का कारोबार बिना किसी रोक-टोक के चलता रहा।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब सरोजनीनगर क्षेत्र में एक संदिग्ध ट्रक को पकड़ा गया। जांच के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, जिसके चलते पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस घोटाले में खनन माफिया, टोल प्लाजा प्रबंधन और परिवहन विभाग के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। यदि ऐसा है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी राजस्व और कानून व्यवस्था पर सीधा हमला भी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन इस खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध खनन और परिवहन का यह संगठित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर इस तरह के घोटालों पर रोक लगाई जाए।
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