धामनोद (धार)। धामनोद में बैसाखी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। स्थानीय गुरुद्वारे में सिख एवं सिंधी समाज के लोगों ने एकत्र होकर भक्ति भाव से कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान “मेरे सतगुरु दे दरबार संगता आइया” और “ऐसे गुरु को बल-बल जाइए” जैसे शब्द कीर्तन गूंजते रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत नितनेम पाठ से हुई, जिसके बाद निशान साहिब का चोला सरबजीत सिंह, हरपाल सिंह, यश सलूजा और जितेंद्र वाधवानी द्वारा बदला गया। संगत ने “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष के साथ माहौल को भक्तिमय बना दिया।
इसके बाद संगत द्वारा सुखमनी साहिब का पाठ किया गया और शब्द कीर्तन प्रस्तुत किए गए। ज्ञानी दलजीत सिंह ने अरदास कर संगत की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के दौरान कड़ा प्रसाद वितरित किया गया और जलेबी खिलाकर श्रद्धालुओं का मुंह मीठा कराया गया।

अंत में गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
गौरतलब है कि बैसाखी पर्व रबी की फसल के पकने और कटाई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। साथ ही सिख धर्म में इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।
OneIndia24live Hindi News Channel Today Breaking News Hindi Samachar